Thursday, October 6, 2011

गीता - वसंतेश्वरी - पन्द्रहवाँ अध्याय-उर्ध्वमूल-अश्वत्थयोग-प्रो बसन्त प्रभात


              देह सनातन जीव ही जान अंश मम पार्थ
              एक्य प्रकृति से होय जबमन इन्द्रिय स्वीकार।। 

      पन्द्रहवाँ अध्याय-उर्ध्वमूल-अश्वत्थयोग


अविनाशी अश्वत्थ यह नीचे शाखा ऊपर मूल
छंद पर्ण इस वृक्ष के जानत विज्ञ विभेद।। 1।।

त्रिगुण विषय कोपल शाखाएँ, गहराई सब लोक
कर्म बन्धन जटिल जड़, फैली चारों ओर ।। 2।।

इसका रूप न प्राप्त यहां है, आदि अन्त स्थित नहीं
 द्रढ़ मूल के अश्वत्थ को काट शस्त्र वैराग्य । 3।।

जहाँ गए नहिं लौटते, भली भांति खोजे परम
जिससे फैली आदि वृत्ति ,आदि पुरुष शरणांगति।। 4।।

रहित मान अरु मोह से, है स्थित अध्यात्म
काम नष्ट सुख-दुःख गए, नाश रहित पद प्राप्त।। 5।।

जिसे न भासित सूर्य कर, नहिं पावक नहिं चन्द्र
जहाँ गए नहि लौटते, है मम परमम धाम ।। 6।।

देह सनातन जीव ही जान अंश मम पार्थ
एक्य प्रकृति से होय जब, मन इन्द्रिय स्वीकार।। 7।।

एक ठौर से दूसरे  पवन गन्ध ले साथ
तैसे देही मन सहित अपर देह उड़ जात ।। 8।।

ध्राण श्रोत्र रसना त्वचा, लिए चक्षु मन साथ
सब विषयों को भोगता आश्रय कर हे पार्थ ।। 9।।



स्थित भोगे अरु तजे तीन गुणों से युक्त
मूढ़ न जाने तत्व को ज्ञानवन्त ही जान।। 10।।

जानत हैं इस देहि को, योगी जन उद्योग
अशुचि  मूढ़ नहि देहि को, करते भी उद्योग।। 11।।

भासित करता जगत को रवि स्थित जो तेज
चन्द्र अग्नि में तेज जो जान उसे मम तेज।। 12।।

धारण करता भूत में, भू प्रवेश निज ओज
रस स्वरूप शशि में बसा, सर्व औषधी पुष्ट।। 13।।

सब प्राणिन की देह में, वैश्वानर रह पार्थ
आश्रित कर मैं प्राण को, अन्न पचाता चार।। 14।।

सब भूतों के हृदय में अन्तर्यामी पैठ
ज्ञान अपोहन स्मृति मुझसे होते जान
मैं ही वैद्य सभी वेदों का,
वेदान्त वेद का कर्ता ज्ञाता ।। 15।।

दो पुरुष इस लोक में, क्षर अक्षर हे पार्थ
सब भूतों का देह क्षर, देही अक्षर जान।। 16।।

उत्तम  पुरुष तो अन्य है, कर प्रवेष त्रय लोक
कर्ता भर्ता अविनाशी वह ईश्वर है परमात्म है ।। 17।।

मैं अतीत हूँ क्षेत्र से और जीव से श्रेष्ठ
लोक वेद में जान तू  उत्तम  पुरुष प्रसिद्ध।। 18।।

जो ज्ञानी यह जानता मैं पुरुषोत्तम पार्थ
सर्वज्ञ नर सब भाव से, मुझे भजें दिन-रात।। 19।। 


परम गुह्य इस शास्त्र को कहा तोर हित पार्थ
जो नर जाने तत्व को, विज्ञ कृतार्थ हो जात।। 20।।






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